रियो ओलंपिक: ओपी जैशा बोली, मैं वहां मर सकती थी….



रियो ओलंपिक के मैराथन में भारत की ओर से भाग लेने वाली ओपी जैशा भारत लौट आई हैं. मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए ,वो केवल यही बोली, “मैं वहां मर सकती थी”.

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार रियो में जैशा जब दौड़ रही थीं, तो उन्हें एनर्जी ड्रिंक्स दूर की बात है, पानी तक नहीं दिया गया, जबकि इसके लिए भारत को मैराथन ट्रैक पर जगह भी दी गई थी. रेस पूरी होने के बाद जैशा तीन घंटे तक बेहोश रहीं. उन्हें कई बोतल ग्लूकोज भी चढ़ाना पड़ा.

ओलंपिक में महिला मैराथन पूरी करके 89वें नंबर पर रहीं जैशा ने कहा, “वहां बहुत गर्मी थी. सुबह 9 बजे से दौड़ना था. मैं चिलचिलाती धूप में दौड़ रही थी. वहां हमारे लिए न तो पानी था न ही खाने के लिए कुछ. आठ कि.मी. दौड़ने के बाद हमें पानी मिला वो भी ओलिंपिक आयोजकों की तरफ से, लेकिन वह हमारे लिए पर्याप्त नहीं था. ट्रैक पर हर देश ने हर दो किमी की दूरी पर अपना स्टॉल लगाया हुआ था. मैंने भारत का बोर्ड देखा, लेकिन वहां कोई नहीं था.”

 जैशा ने कहा, “हमें लगा था कि हमारे टेक्निकल अधिकारी हमें पानी वगैरह मुहैया कराएंगे. हम किसी दूसरी टीम से पानी नहीं ले सकते थे.  मुझे बहुत परेशानी हो रही थी और रेस के बाद मैं बेहोश हो गई थी. मुझे ग्लूकोज चढ़ाया गया. मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं मर जाऊंगी.

मैराथन पूरी करने के बाद जैशा फिनिश लाइन के पास ही बेहोश होकर गिर गई थीं, जिसके बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया. अस्पताल में उनके कोच निकोलाई नेसारेव का एक महिला डॉक्टर से विवाद हो गया. इसके  बाद स्थानीय पुलिस ने उन्हें आधे दिन तक हिरासत में रखा.

 

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