पॉर्न देखना अभिव्यक्ति की आजादी का हिस्सा नहीं, लगनी चाहिए रोक- सुप्रीम कोर्ट



सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर सार्वजनिक स्थलों पर अश्लील वीडियो देखने की अनुमति नहीं दी जाएगी. इसमें बच्चों का प्रयोग सहन नहीं किया जा सकता.

चाइल्ड पॉर्नोग्राफी पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार से कड़े कदम उठाने को कहा है. कोर्ट ने कहा कि अभिव्यगक्ति की आजादी चाइल्डह पॉर्नोग्राफी पर लागू नहीं होती है. बच्चों को इसका शिकार नहीं बनाया जा सकता. कोर्ट की यह टिप्पहणी सरकार के उस बयान के बाद आई जिसमें उसने कहा था कि निजता के अधिकार के चलते वह ऐसा नहीं कर सकती. इस पर कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “निजता क्या होती है. कोर्इ भी ऑनलाइन नहीं दिखना चाहता.”
जस्टिस दीपक मिश्रा और एसके सिंह ने सरकार से कहा कि अश्लीनलता और अनुमति के बीच एक लाइन होनी चाहिए। जस्टिस सिंह ने कहा, “कुछ लोगों को माेनालिसा में भी अश्लीलता दिखती हैं. कला और अश्लीलता के बीच बंटवारे की लाइन तो होनी ही चाहिए. यह मुश्किल काम है लेकिन ऐसा होना जरूरी है.”

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