तू है दुर्गा,इसे जान,पहचान…



मैं हूं दुर्गा, तू है दुर्गा

इसे जान, खुद को पहचान।

सुन अपने नाद को

समझ उस संवाद को,

जो दब गया है कहीं

या दबा दिया है कहीं।

तू है कीर्ति

इस धरा की अनमोल

करती है तू प्रतिनिधित्व

उस पूर्ण ऊर्जा की,

जिसे कहते हैं सब ईश्वर।

जान अपने आप को,

पहचान अपने आप को।

न उलझ, इस बात में

कि तू है केवल एक महिला

जिसके जीवन में है बस झमेला।

कर बात

खुद के मानव होने के अधिकारों की

रो मत, सो मत, जाग

कर जतन

तुझमें है जीवन दर्शन

क्योंकि तू है दुर्गा।

तेरे हैं रूप कई

जिन्हें तू अब तक न समझ सकी।

करती है पूजा दुर्गा की,

याद नहीं तुझे अपनी।

कहकर खुद को एक बेटी

रोती है तू,

लगता है तुझे डर उससे

जिसके होने का अर्थ है तुझसे।

उस को कोसना छोड़,

अपने होने के महत्व को जान।

उससे नहीं,

खुद से आगे बढ़ने की ठान।

अपने अमूल्य जीवन के

पावन महत्व को समझ,

क्योंकि तू है दुर्गा, इसे जान, पहचान..।

-चारु लता-

 

 

 

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