अंग्रेजी मेम क्यों बनी राधे मां?



सुखविंदर कौर उर्फ राधे मां इन दिनों सुर्खियों में हैं। इसका कारण सोशल मीडिया पर वाइरल हुई एक फोटो हैं, जिसमें राधे मां ने लाल रंग की टोपी, लाल रंग की मिनी स्कर्ट, स्कीन कलर की सेलैक्स और लाल रंग के लांग बूट पहने हुए हैं। कुछ लोगों को राधे मां के इस पहनावे पर एतराज़ है। उनका कहना है कि वह खुद को दुर्गा मां का रूप कहती हैं, लेकिन कपड़े अंग्रेजों की मम्मी की तरह क्यों पहनती हैं?
लुधियाना के अश्विनी कुमार बहल और धीरज शर्मा ने राधे मां के खिलाफ केस दर्ज किया है। अश्विनी और धीरज ने अपनी शिकायत में कहा है कि “हम वैष्णो देवी, चिंतपूर्णी देवी और ज्वालाजी के भक्त हैं, राधे मां खुद को मां दुर्गा की अवतार बताती हैं। उन्होंने मिनी स्कर्ट पहनकर मां दुर्गा का अपमान किया है। इससे हमारी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।
मान्यता है कि भारत में कुल 24 करोड़ देवी देवताओं की पूजा होती हैं। उनमें से दुर्गा मां प्रमुख हैं। जिन्हें मंदिरों या पंडालों में पूरे श्रृंगार के साथ पूजा जाता है। भक्त जन यही जानते हैं कि दुर्गा मां शेर पर सवार रहती हैं, और लाल रंग की साड़ी, लहंगा-चोली पहने होती हैं, उनके दायें हाथ में त्रिशूल होता है। लेकिन इसके साथ ही एक सच यह भी है कि किसी ने दुर्गा मां को इस रूप में अपनी खुली आंखों से नहीं देखा है। मंदिरों में सदियों से जो रूप दिखाया जाता रहा है, वही भक्त जानते हैं। वास्तव में कोई जानता भी नहीं की जिन्हें वे माता कहते हैं, वो दिखती कैसी होंगी?
या फिर यह कि दुर्गा मां वास्तव में पहनती क्या होंगी? क्या वह साड़ी ही पहनती होंगी? क्या उनके हाथ में हर समय त्रिशूल रहता होगा? क्या वह हमेशा शेर पर ही सवार रहती होंगी?
ये ऐसे सवाल हैं जो माता के भक्तों की भीड़ में जुटा कोई भक्त शायद ही कभी सोच पाता होगा। इसके कई कारण हैं। एक तो यह कि भक्ति के बहाव में उन्हें कभी इतना सोचने का मौका नहीं मिलता। दूसरा वे दुर्गा मां को केवल उनके रूप और शक्ति के बखान के कारण ही जानते हैं।
पंडालों में लगी मां की विशालकाय मूर्ति भक्तों को उनके धरती पर होने का आभास दिलाती है। जो वास्तव में भारतीय संस्कृति की एक शक्तिशाली महिला का प्रतिरूप है। जिन्हें मां का रूप कहा जाता है। भारतीय पहनावा, भारतीय आभूषण, भारतीय श्रृंगार और साथ ही भारतीय तौर तरीके। इन्हीं का समावेश भक्त अपनी मां में देखते हैं या देखना चाहते हैं। उनके लिए दुर्गा मां एक परंपरागत भारतीय महान महिला हैं।
चाहे भक्त विदेश में रहें या फिर देश में, मां का उनके लिए एक ही रूप है। जो कभी बदलता नहीं। ऐसे में खुद को दुर्गा मां का अवतार कहने वाली महिला किसी और परिधान में दिखे तो यह भक्तों के लिए मां का और उनकी भावनाओं का अपमान है।
हम दुर्गा मां की मूर्ति पर जो आभूषण, परिधान और श्रृंगार देखते है वो माता के भक्तों द्वारा ही निर्धारित किया गया है। जिसे वह किसी भी कीमत पर बदलना नहीं चाहते। फिर चाहे स्वयं दुर्गा मां ही अपने को मॉर्डन क्यों न बनाना चाहे। इस पर मां को भी अपनी मर्जी करने का हक़ नहीं। भक्त जैसा चाहते हैं और सजाते हैं मां वैसे ही रहती हैं। दुर्गा माता को भी पता है कि दृश्यमान दुनिया में, केवल भक्तों(इनसान)की चलती है।
ऐसे में अपने भक्तों की राधे मां को भी समझना होगा कि अवतरित मां बनना इतना आसान नहीं। अपने बच्चों के साथ साथ दूसरों के बच्चों की भावनाओं का भी पूरा पूरा ध्यान रखना पड़ता है। अपने पहनावे का विशेष ध्यान रखना होता है। क्योंकि फैशन साधारण इनसान के लिए होता है। यहां खाने-पहनने में भगवान की अपनी कोई इच्छा नहीं होती। भक्त जो पहनाए वही पहनना होता है, जो भोग लगाये वही खाना होता है। और इसके बदले भक्तों की इच्छा को अधिक मात्रा में पूरा करना होता है।

-चारु लता

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